Protest against child labour by kartavyabodha headed by Sh.Shant PrakashSunday, June 14, 2009
Saturday, March 21, 2009
आर्सेनिक का जहर
200 किमी में फैला आर्सेनिक का जहर
नई दिल्ली, भाषा : गैंग्रीन, आंत, किडनी और मूत्राशय के कैंसर सहित कई बीमारियों का कारण बनने वाले आर्सेनिक युक्त जल का खतरा पश्चिम बंगाल के बाद अब उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली में भी पैर पसार चुका है। इन सभी राज्यों से लिए गए पानी के नमूने में विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों से ज्यादा आर्सेनिक पाया गया है। वाटर कम्युनिटी इंडिया की अध्यक्ष मीनाक्षी अरोड़ा ने बताया कि आर्सेनिक युक्त जल के सेवन से होने वाली बीमारियां मानव जगत के लिए गंभीर चुनौती हैं। इससे पानी नमकीन हो जाता है और इससे गाल ब्लैडर और त्वचा कैंसर जैसी बीमारियां हो जाती हैं।
वर्ष 2008-09 के लिए यूनीसेफ द्वारा किए गए सर्वे में आर्सेनिक संकट वाले क्षेत्रों का पता चला है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने यूनीसेफ से यह सर्वे कराया है। सर्वे की प्राथमिक रिपोर्ट से राज्य के 31 जिलों में आर्सेनिक के खतरों की बात सामने आई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार जल में आर्सेनिक की मात्रा प्रति अरब भाग में 10 भाग या प्रति लीटर में 0।05 माइक्रोग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। लेकिन इन क्षेत्रों में किए गए सर्वे से पता चला है कि आर्सेनिक की मात्रा प्रति अरब भाग में 100 से 150 भाग हो गई है।
सावधानी के तौर पर उत्तर प्रदेश के सबसे प्रभावित जिलों बलिया एवं लखीमपुर में सैकड़ों की संख्या में नलकूपों को सील कर दिया गया है। अरोड़ा ने बताया कि सर्वे में उत्तर प्रदेश के बहराइच, चंदौली, गाजीपुर, गोरखपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, संतकबीर नगर, उन्नाव, बरेली और मुरादाबाद जिलों में अधिक आर्सेनिक की मात्रा पाई गई है।
जबकि राज्य के रायबरेली, मिर्जापुर, बिजनौर, मेरठ, संत रविदास नगर, सहारनपुर और गोंडा आंशिक रूप से प्रभावित जिलों में शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि दिल्ली के दक्षिण पश्चिम में दो सौ किलोमीटर क्षेत्र से भी अधिक आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्र में बदल रहा है। यमुना के जल में भारी मात्रा में प्रदूषकों जैसे रासायनिक कचरे के कारण आर्सेनिक का प्रभाव पड़ रहा है।
बिहार में 12 जिलों के लोग आर्सेनिक युक्त जहरीला पानी पीने को मजबूर हैं। राज्य सरकार ने भी इस बात को स्वीकार किया है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में आर्सेनिक का कहर सबसे भयानक रूप में सामने आया है। वहां लगभग 20 जिले गंभीर रूप से प्रभावित हैं और 70 लाख से अधिक लोग आर्सेनिक जनित बीमारियों की चपेट में हैं।
नई दिल्ली, भाषा : गैंग्रीन, आंत, किडनी और मूत्राशय के कैंसर सहित कई बीमारियों का कारण बनने वाले आर्सेनिक युक्त जल का खतरा पश्चिम बंगाल के बाद अब उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली में भी पैर पसार चुका है। इन सभी राज्यों से लिए गए पानी के नमूने में विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों से ज्यादा आर्सेनिक पाया गया है। वाटर कम्युनिटी इंडिया की अध्यक्ष मीनाक्षी अरोड़ा ने बताया कि आर्सेनिक युक्त जल के सेवन से होने वाली बीमारियां मानव जगत के लिए गंभीर चुनौती हैं। इससे पानी नमकीन हो जाता है और इससे गाल ब्लैडर और त्वचा कैंसर जैसी बीमारियां हो जाती हैं।
वर्ष 2008-09 के लिए यूनीसेफ द्वारा किए गए सर्वे में आर्सेनिक संकट वाले क्षेत्रों का पता चला है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने यूनीसेफ से यह सर्वे कराया है। सर्वे की प्राथमिक रिपोर्ट से राज्य के 31 जिलों में आर्सेनिक के खतरों की बात सामने आई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार जल में आर्सेनिक की मात्रा प्रति अरब भाग में 10 भाग या प्रति लीटर में 0।05 माइक्रोग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। लेकिन इन क्षेत्रों में किए गए सर्वे से पता चला है कि आर्सेनिक की मात्रा प्रति अरब भाग में 100 से 150 भाग हो गई है।
सावधानी के तौर पर उत्तर प्रदेश के सबसे प्रभावित जिलों बलिया एवं लखीमपुर में सैकड़ों की संख्या में नलकूपों को सील कर दिया गया है। अरोड़ा ने बताया कि सर्वे में उत्तर प्रदेश के बहराइच, चंदौली, गाजीपुर, गोरखपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, संतकबीर नगर, उन्नाव, बरेली और मुरादाबाद जिलों में अधिक आर्सेनिक की मात्रा पाई गई है।
जबकि राज्य के रायबरेली, मिर्जापुर, बिजनौर, मेरठ, संत रविदास नगर, सहारनपुर और गोंडा आंशिक रूप से प्रभावित जिलों में शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि दिल्ली के दक्षिण पश्चिम में दो सौ किलोमीटर क्षेत्र से भी अधिक आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्र में बदल रहा है। यमुना के जल में भारी मात्रा में प्रदूषकों जैसे रासायनिक कचरे के कारण आर्सेनिक का प्रभाव पड़ रहा है।
बिहार में 12 जिलों के लोग आर्सेनिक युक्त जहरीला पानी पीने को मजबूर हैं। राज्य सरकार ने भी इस बात को स्वीकार किया है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में आर्सेनिक का कहर सबसे भयानक रूप में सामने आया है। वहां लगभग 20 जिले गंभीर रूप से प्रभावित हैं और 70 लाख से अधिक लोग आर्सेनिक जनित बीमारियों की चपेट में हैं।
Thursday, January 22, 2009
Saturday, July 5, 2008
Wednesday, April 18, 2007
Tuesday, April 17, 2007
अंजुमन अमन दोस्त इन्सान दोस्त और राष्ट्रवादी मुस्लिम विकास मंच ,मेरठ
अंजुमन अमन दोस्त इन्सान दोस्त
आरिफ़ बेग पूर्व मंत्री भारत सरकार , गिरीश जुयाल , शांत प्रकाश
राष्ट्रवादी मुस्लिम विकास मंच ,मेरठ
गिरीश जुयाल, मोहम्मद अफ़जाल,शांत प्रकाश
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